शिर्डी के साँई बाबा जी के दर्शनों का सीधा प्रसारण... अधिक जानने के लियें पूरा पेज अवश्य देखें

शिर्डी से सीधा प्रसारण ,... "श्री साँई बाबा संस्थान, शिर्डी " ... के सौजन्य से... सीधे प्रसारण का समय ... प्रात: काल 4:00 बजे से रात्री 11:15 बजे तक ... सीधे प्रसारण का इस ब्लॉग पर प्रसारण केवल उन्ही साँई भक्तो को ध्यान में रख कर किया जा रहा है जो किसी कारणवश बाबा जी के दर्शन नहीं कर पाते है और वह भक्त उससे अछूता भी नहीं रहना चाहते,... हम इसे अपने ब्लॉग पर किसी व्यव्सायिक मकसद से प्रदर्शित नहीं कर रहे है। ...ॐ साँई राम जी...

Friday, 27 June 2014

Procedure and Story of Baba SAI's Vrat


© Shirdi Sai Baba Life Teachings and Stories

Rules to be followed for Baba Sai's Vrat:

1. Any Woman, Man or Child can do this Vrat. 

2. This Vrat can be done by any person without any difference of Caste and Creed. 

Saturday, 21 June 2014

जागो साई

भोर भई अब जागो साई, भोर भई अब जागो जागो साई, भक्त खड़े है द्वार पे तेरे, भक्त खड़े है द्वार पे तेरे, अब निद्रा, को त्यागो साई, भोर भई अब जागो साई, भोर भई अब जागो जागो साई।।

बाबा साई की कृपा हम सब पर सदा बरसती रहे ।

ॐ साई राम

Wednesday, 18 June 2014

Baba SAI Thanks For Everything..


Baba SAI, with obedience, I offer the flower of my heart to You at your Lotus Feet. Do keep showering the grace of Your abundant compassion on me. The only gift I could offer is the faith (Shraddha) I have in You and Patience (Saburi) I have in your decision's for me.  Please make use of me as a tool in your cosmic play. Protect me always and see that I move care-free under Your control. I pray to You, with total devotion, to bless me do my duties with noble thoughts and in true spirit. It is sufficient if the responsibilities entrusted to me are good and capable of being shouldered by me.

You are the Supreme Bliss that can lead me ever from behind. You alone can shape my spiritual destiny. Baba SAI Thanks For Everything..

Om Sai Ram..

Sunday, 8 June 2014

गंगा दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ

पुराणों के अनुसार गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन स्वर्ग से गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था, इसलिए यह महापुण्यकारी पर्व माना जाता है। गंगा दशहरा के दिन सभी गंगा मंदिरों में भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। वहीं इस दिन मोक्षदायिनी गंगा का पूजन-अर्चना भी किया जाता है।

क्या हैं दान-पुण्य का महत्व :-

गंगा दशहरा के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन लोग पूजा-अर्चना करने के साथ ही दान-पुण्य करते हैं। कई लोग तो स्नान करने के लिए हरिद्वार जैसे पवित्र नदी में स्नान करने जाते हैं। इस दिन दान में सत्तू, मटका और हाथ का पंखा दान करने से दुगुना फल प्राप्त होता है।

गंगा दशहरा के दिन किसी भी नदी में स्नान करके दान और तर्पण करने से मनुष्य जाने-अनजाने में किए गए कम से कम दस पापों से मुक्त होता है। इन दस पापों के हरण होने से ही इस तिथि का नाम गंगा दशहरा पड़ा है।

क्यों और कैसे करें गंगा दशहरा व्रत :

* गंगा दशहरा का व्रत भगवान विष्णु को खुश करने के लिए किया जाता है।

* इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है।

* इस दिन लोग व्रत करके पानी भी (जल का त्याग करके) छोड़कर इस व्रत को करते हैं।

* ग्यारस (एकादशी) की कथा सुनते हैं और अगले दिन लोग दान-पुण्य करते हैं।

* इस दिन जल का घट दान करके फिर जल पीकर अपना व्रत पूर्ण करते हैं।

* इस दिन दान में केला, नारियल, अनार, सुपारी, खरबूजा, आम, जल भरी सुराई, हाथ का पंखा आदि चीजें भक्त दान करते हैं।

Sunday, 1 June 2014

संसार के सारे तीर्थ श्री साई चरणों में ही विद्यमान हैं।  

साईं बाबा बैठे हुए थे कि अचानक एक व्यक्ति ने उनके सामने आकर हाथ जोड़ते हुए कहा - "अब कुछ दिनों के लिए मुझे आपसे दूर रहना पड़ेगा|"

"कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहा हूं| आशीर्वाद दीजिए मेरी यात्रा सफल हो|"

साईं बाबा ने मुस्कराकर उसकी ओर देखा और बोले - "तुम यात्रा पर चले गए तो यह गांव सूना हो जाएगा| गांव वाले चाहे तुम्हारी कमी महसूस करें या न करें, लेकिन मुझे तुम्हारी कमी बहुत अखरेगी| कोई बात नहीं, जाओ| त्रिवेणी स्नान कर आओ| सुना है, जन्म-जन्मान्तर के पाप धुल जाते हैं|"

वह सुनकर हैरान रह गया| अभी तो उसकी पत्नी और घरवालों को ही यह बात पता थी कि वह प्रयागराज त्रिवेणी स्नान करने जा रहा है| फिर साईं बाबा को इस बात का कैसे पता चला ? उसने साईं बाबा के चरण पकड़ लिए और बोला - "आप तो अन्तर्यामी हैं| मुझे आशीर्वाद दीजिए कि आपकी मुझ पर कृपा सदा ऐसे ही बनी रहे|"

फिर उसने भावविह्वल होकर साईं बाबा के चरणों पर अपना मस्तक रख दिया| उसे ऐसा लगा जैसे साईं बाबा के चरणों से एक साथ गंगा, यमुना और सरस्वती प्रवाहित हो रही हों| वह आश्चर्य से बाबा के चरणों से प्रवाहित होती उन तीनों धाराओं को देखने लगा| उसे अपनी आँखों पर सहसा विश्वास नहीं हो रहा था| वह यह सब कुछ जो देख रहा है, वह सत्य है या एक सपना?

तभी उसने अनुभव किया, जैसे वह संगम में स्नान कर रहा है| यह सब अनुभव कर वह आश्चर्यचकित हो गया| दोनों हाथ जोड़कर बोला - "धन्य हों बाबा ! आप धन्य हों| आपके चरणों में बैठे ही बैठे मैंने त्रिवेणी स्नान कर लिया| अब मुझे प्रयागराज जाने की कोई आवश्यकता नहीं है|"

"तुमने त्रिवेणी स्नान यहीं बैठे-बैठे कर लिया ?" साईं बाबा मुस्करा रहे थे|

"हां बाबा !" उसने प्रसन्न स्वर में कहा - "मैं तो व्यर्थ में ही इधर-उधर भटक रहा था| मुझे क्या मालूम कि संसार के सारे तीर्थ इन चरणों में ही विद्यमान हैं|"

"नहीं, संसार के सारे तीर्थ ही नहीं स्वयं भगवान भी तुम्हारी भावनाओं में विराजमान हैं| केवल श्रद्धा, भक्ति और विश्वास की आवश्यकता है| माया-मोह से परे हटकर जब कोई व्यक्ति इन तीनों गुणों को अपना लेता है, सहज ही वह भगवान के दर्शन पा लेता है| यही ब्रह्म ज्ञान है|

मस्जिद में बैठे भक्तगण साईं बाबा की इस अद्भुत लीला को देखकर भाव-विभोर हो उठे| सबको इस बात पर बड़ा आश्चर्य हो रहा था| उसके व्यवहार पर सब चकित थे|

वह तेजी से झुका और साईं बाबा के चरणों से लिपट गया| उसकी आँखों से आंसुओं की धारा बह निकली थी|

वह श्रद्धा से गद्गद् हो गया|

Friday, 30 May 2014

मुझे मानव से माधव बना दिया


तुम लोगो ने मुझे मानव से माधव बना दिया है | प्रत्येक मानव में माधव के दर्शन करो, वही मेरी सच्ची पूजा है.. :: बाबा साईं...

ॐ श्री साईंनाथाय नम: