शिर्डी के साँई बाबा जी के दर्शनों का सीधा प्रसारण... अधिक जानने के लियें पूरा पेज अवश्य देखें

शिर्डी से सीधा प्रसारण ,... "श्री साँई बाबा संस्थान, शिर्डी " ... के सौजन्य से... सीधे प्रसारण का समय ... प्रात: काल 4:00 बजे से रात्री 11:15 बजे तक ... सीधे प्रसारण का इस ब्लॉग पर प्रसारण केवल उन्ही साँई भक्तो को ध्यान में रख कर किया जा रहा है जो किसी कारणवश बाबा जी के दर्शन नहीं कर पाते है और वह भक्त उससे अछूता भी नहीं रहना चाहते,... हम इसे अपने ब्लॉग पर किसी व्यव्सायिक मकसद से प्रदर्शित नहीं कर रहे है। ...ॐ साँई राम जी...

Sunday, 8 June 2014

गंगा दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ

पुराणों के अनुसार गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन स्वर्ग से गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था, इसलिए यह महापुण्यकारी पर्व माना जाता है। गंगा दशहरा के दिन सभी गंगा मंदिरों में भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। वहीं इस दिन मोक्षदायिनी गंगा का पूजन-अर्चना भी किया जाता है।

क्या हैं दान-पुण्य का महत्व :-

गंगा दशहरा के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन लोग पूजा-अर्चना करने के साथ ही दान-पुण्य करते हैं। कई लोग तो स्नान करने के लिए हरिद्वार जैसे पवित्र नदी में स्नान करने जाते हैं। इस दिन दान में सत्तू, मटका और हाथ का पंखा दान करने से दुगुना फल प्राप्त होता है।

गंगा दशहरा के दिन किसी भी नदी में स्नान करके दान और तर्पण करने से मनुष्य जाने-अनजाने में किए गए कम से कम दस पापों से मुक्त होता है। इन दस पापों के हरण होने से ही इस तिथि का नाम गंगा दशहरा पड़ा है।

क्यों और कैसे करें गंगा दशहरा व्रत :

* गंगा दशहरा का व्रत भगवान विष्णु को खुश करने के लिए किया जाता है।

* इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है।

* इस दिन लोग व्रत करके पानी भी (जल का त्याग करके) छोड़कर इस व्रत को करते हैं।

* ग्यारस (एकादशी) की कथा सुनते हैं और अगले दिन लोग दान-पुण्य करते हैं।

* इस दिन जल का घट दान करके फिर जल पीकर अपना व्रत पूर्ण करते हैं।

* इस दिन दान में केला, नारियल, अनार, सुपारी, खरबूजा, आम, जल भरी सुराई, हाथ का पंखा आदि चीजें भक्त दान करते हैं।

Sunday, 1 June 2014

संसार के सारे तीर्थ श्री साई चरणों में ही विद्यमान हैं।  

साईं बाबा बैठे हुए थे कि अचानक एक व्यक्ति ने उनके सामने आकर हाथ जोड़ते हुए कहा - "अब कुछ दिनों के लिए मुझे आपसे दूर रहना पड़ेगा|"

"कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहा हूं| आशीर्वाद दीजिए मेरी यात्रा सफल हो|"

साईं बाबा ने मुस्कराकर उसकी ओर देखा और बोले - "तुम यात्रा पर चले गए तो यह गांव सूना हो जाएगा| गांव वाले चाहे तुम्हारी कमी महसूस करें या न करें, लेकिन मुझे तुम्हारी कमी बहुत अखरेगी| कोई बात नहीं, जाओ| त्रिवेणी स्नान कर आओ| सुना है, जन्म-जन्मान्तर के पाप धुल जाते हैं|"

वह सुनकर हैरान रह गया| अभी तो उसकी पत्नी और घरवालों को ही यह बात पता थी कि वह प्रयागराज त्रिवेणी स्नान करने जा रहा है| फिर साईं बाबा को इस बात का कैसे पता चला ? उसने साईं बाबा के चरण पकड़ लिए और बोला - "आप तो अन्तर्यामी हैं| मुझे आशीर्वाद दीजिए कि आपकी मुझ पर कृपा सदा ऐसे ही बनी रहे|"

फिर उसने भावविह्वल होकर साईं बाबा के चरणों पर अपना मस्तक रख दिया| उसे ऐसा लगा जैसे साईं बाबा के चरणों से एक साथ गंगा, यमुना और सरस्वती प्रवाहित हो रही हों| वह आश्चर्य से बाबा के चरणों से प्रवाहित होती उन तीनों धाराओं को देखने लगा| उसे अपनी आँखों पर सहसा विश्वास नहीं हो रहा था| वह यह सब कुछ जो देख रहा है, वह सत्य है या एक सपना?

तभी उसने अनुभव किया, जैसे वह संगम में स्नान कर रहा है| यह सब अनुभव कर वह आश्चर्यचकित हो गया| दोनों हाथ जोड़कर बोला - "धन्य हों बाबा ! आप धन्य हों| आपके चरणों में बैठे ही बैठे मैंने त्रिवेणी स्नान कर लिया| अब मुझे प्रयागराज जाने की कोई आवश्यकता नहीं है|"

"तुमने त्रिवेणी स्नान यहीं बैठे-बैठे कर लिया ?" साईं बाबा मुस्करा रहे थे|

"हां बाबा !" उसने प्रसन्न स्वर में कहा - "मैं तो व्यर्थ में ही इधर-उधर भटक रहा था| मुझे क्या मालूम कि संसार के सारे तीर्थ इन चरणों में ही विद्यमान हैं|"

"नहीं, संसार के सारे तीर्थ ही नहीं स्वयं भगवान भी तुम्हारी भावनाओं में विराजमान हैं| केवल श्रद्धा, भक्ति और विश्वास की आवश्यकता है| माया-मोह से परे हटकर जब कोई व्यक्ति इन तीनों गुणों को अपना लेता है, सहज ही वह भगवान के दर्शन पा लेता है| यही ब्रह्म ज्ञान है|

मस्जिद में बैठे भक्तगण साईं बाबा की इस अद्भुत लीला को देखकर भाव-विभोर हो उठे| सबको इस बात पर बड़ा आश्चर्य हो रहा था| उसके व्यवहार पर सब चकित थे|

वह तेजी से झुका और साईं बाबा के चरणों से लिपट गया| उसकी आँखों से आंसुओं की धारा बह निकली थी|

वह श्रद्धा से गद्गद् हो गया|

Friday, 30 May 2014

मुझे मानव से माधव बना दिया


तुम लोगो ने मुझे मानव से माधव बना दिया है | प्रत्येक मानव में माधव के दर्शन करो, वही मेरी सच्ची पूजा है.. :: बाबा साईं...

ॐ श्री साईंनाथाय नम:

Way To Moksha (liberation) BABA SAI..

“The objects of our life such as Dharma, Artha and Kama are attainable with our effort, but the fourth object, Moksha (liberation) can only had with the help of the Sadguru Baba SAI"..

So let's surrender ourself to the lotus feet of Lotus Feet Of our Sadguru SAI, then only all kinds of doubts and fears within the heart can be vanquished and we can attain Moksha (liberation)..

Om Sai Ram

"Nav Din Nav Tariq Allha Miya Ne Apna Dhuniya Lagaya".. means Ninth day. BABA left his body on 9th day of Muslim month Moharam As Allah's Wish..

 "NAV DIN NAV TARIQ ALLHA MIYA NE APNA DHUNIYA LAGAYA, MARZI ALLHA KI..." 

(On the 9th day Of  Moharam Allah will take away his own kept lamp. As Allah wish...)

Nav Din Nav Tariq means Ninth day. BABA left his body on 9th day of Muslim month Moharam..

In the year 1918, few months before BABA leaving his body.He called Bade Baba's son named Kasim and gave him some chapatti's and cooked chicken and told him to take this to Aurangabad and meet Shamsuddin Fakir Miya and give all this to him and also give him Rs 250. Tell Shamsuddin Fakir Miya to do Mauloo and Kawali and also do Nyaas .

{Mauloo = Singing songs of Prophet Mohammad, Kawali = Singing songs of saints, & Nyaas = Cooking food and distributing..}

BABA also gave Kasim a garland of marigold flowers and told him to put it into the neck of Banney miya and tell him 

"NAV DIN NAV TARIQ ALLHA MIYA NE APNA DHUNIYA LAGAYA. MARZI ALLHA KI" 

(On the 9th day Allah will take away his own kept lamp. As Allah wish! )

Getting orders from Baba Kasim spoke that he dose not have any knowledge of Aurangabad. Baba told him to take Chotekhan as guide. So Chotekhan, Kasim & his servant Amir went to Aurangabad & alighted at Aurangabad station....

On the station Shamsuddin Fakir was himself standing there, waiting for these three, "Who are the guests from Sai fakir?” asked Shamsuddin fakir. Chotekhan, Kasim went ahead and greeted him. Then Shamsuddin Fakir uttered the same words which Baba had told to Kasim ::

"NAV DIN NAV TARIQ ALLHA MIYA NE APNA DHUNIYA LAGAYA. MARZI ALLHA KI”
Latter Samsuddin Fakir took these three people to his place. 

After giving Rs.250 by Kasim to Shamsuddin Fakir, Nyaas was done and many people had food. Latter in the night program of Mauloo & Kawali was also done as per Baba’s wish. 

On the next day Shamsuddin Fakir and these three went to Banney Miya. At that time Banney Miya was standing (in meditation) with one hand up and the other down. The people near to Banney Miya told Chotekhan and others not to go near Banney Miya as he would get angry. Chotekhan and others waited for some time, but latter Chotekhan with little daring put the garland of marigold flowers given by BABA into the neck of Banney Miya.

As soon as the garland fell into the neck, Banney Miya opened his eyes and uttered

"NAV DIN NAV TARIQ ALLHA MIYA NE APNA DHUNIYA LAGAYA. MARZI ALLHA KI !!”

Banney Miya looked up at the sky and tears started flowing from his eyes. (May be by knowing that the day of BABA leaving his body was near he felt bad).

After 4 months of this, BABA left his body on 9th day of Muslim month Moharam..

Om Sai Ram, Baba Bless Us All..

Thursday, 29 May 2014

साँई मिले थे

साँई मिले थे मुझको कल रात सोते सोते,
करते रहे थे बाते सुप्रभात होते होते,
वो सामने थे मेरे मै उनके सामने था,
था हाथ मेरे सर पे,  मै चरणों को धो रहा था,
बोले क्यों रो रहा है , मेरे साथ होते होते.... ।।

।। ॐ श्री साईं राम ।।